संदर्भ
हाल ही में केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (Emergency Credit Line Guarantee Scheme – ECLGS) 5.0 को मंजूरी दी है। यह योजना मुख्य रूप से पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न आर्थिक दबाव और नकदी संकट (Liquidity Crunch) से प्रभावित व्यवसायों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।
ECLGS क्या है?
वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत ECLGS शुरू की गई थी।
उद्देश्य
- कोविड-19 महामारी से प्रभावित व्यवसायों, विशेषकर MSMEs, को सहायता देना
- कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराना
- व्यवसायों को पुनः संचालन शुरू करने में मदद करना
- रोजगार एवं उत्पादन को बनाए रखना
योजना का संचालन
यह योजना वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित होती है।
प्रमुख संस्था– नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC)
भूमिका: ऋण गारंटी प्रदान करना, सदस्य ऋणदाता संस्थानों (MLIs) के माध्यम से ऋण प्रबंधन, डिफॉल्ट होने की स्थिति में गारंटी भुगतान करना
ECLGS की प्रमुख विशेषता
इस योजना के अंतर्गत यदि कोई उधारकर्ता ऋण चुकाने में असफल रहता है, तो सरकार द्वारा समर्थित NCGTC बैंक/ऋणदाता को नुकसान की भरपाई हेतु गारंटी प्रदान करती है।
इससे:
- बैंकों का जोखिम कम होता है
- व्यवसायों को आसानी से ऋण मिल पाता है
- आर्थिक गतिविधियां बनी रहती हैं
ECLGS 5.0 की मुख्य विशेषताएं
1. उद्देश्य
ECLGS 5.0 का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न: नकदी की कमी, आपूर्ति श्रृंखला बाधाएं, ईंधन लागत वृद्धि, व्यापारिक अनिश्चितता, से प्रभावित व्यवसायों को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराना है।
2. पात्र कर्जदार
(क) MSMEs- Micro, Small and Medium Enterprises जिनके पास कार्यशील पूंजी सीमाएं मौजूद हैं।
(ख) गैर-MSMEs- ऐसे बड़े व्यवसाय जिनके पास मौजूदा क्रेडिट सुविधाएं हैं।
(ग) एयरलाइन क्षेत्र– अनुसूचित यात्री एयरलाइंस
- 31 मार्च 2026 तक बकाया ऋण सुविधाएं
- खाते “Standard Asset” श्रेणी में होने चाहिए
3. गारंटी कवरेज
MSMEs के लिए– 100% गारंटी कवरेज, अर्थात यदि ऋण डिफॉल्ट होता है, तो पूरा जोखिम NCGTC वहन करेगा।
गैर-MSMEs और एयरलाइंस के लिए – 90% गारंटी कवरेज, इससे बैंकिंग क्षेत्र का जोखिम काफी कम हो जाता है।
4. ऋण अवधि
MSMEs एवं गैर-MSMEs
- कुल अवधि: 5 वर्ष
- 1 वर्ष का मोरेटोरियम
मोरेटोरियम का अर्थ
एक निश्चित अवधि तक मूलधन भुगतान से राहत।
एयरलाइन क्षेत्र
- कुल अवधि: 7 वर्ष
- 2 वर्ष का मोरेटोरियम
यह एयरलाइन क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर दिया गया है।
ECLGS 5.0 क्यों महत्वपूर्ण है?
1. MSME क्षेत्र को राहत : MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।
योगदान:
- GDP में लगभग 30% योगदान
- निर्यात में लगभग 45% योगदान
- करोड़ों लोगों को रोजगार
नकदी संकट की स्थिति में यह योजना इनके अस्तित्व को बचाने में सहायक होगी।
2. बैंकिंग प्रणाली में विश्वास : सरकारी गारंटी मिलने से बैंक:
- अधिक ऋण देने को तैयार होते हैं
- जोखिम लेने में सहज होते हैं
इससे ऋण प्रवाह (Credit Flow) बढ़ता है।
3. एयरलाइन क्षेत्र को समर्थन – पश्चिम एशिया संकट के कारण:
- ईंधन लागत बढ़ी
- उड़ान मार्ग प्रभावित हुए
- परिचालन लागत में वृद्धि हुई
ऐसे में एयरलाइन क्षेत्र को दीर्घकालिक राहत देना आवश्यक हो गया था।
4. आर्थिक स्थिरता : यह योजना:
- रोजगार बचाने
- उत्पादन बनाए रखने
- बाजार में मांग कायम रखने
- आर्थिक मंदी को रोकने में सहायक हो सकती है।
चुनौतियां
1. बढ़ता सरकारी दायित्व – यदि बड़े स्तर पर ऋण डिफॉल्ट होता है, तो सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।
2. Moral Hazard- कुछ व्यवसाय सरकारी गारंटी के कारण जोखिमपूर्ण ऋण व्यवहार अपना सकते हैं।
3. वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच– छोटे एवं सूक्ष्म उद्यमों तक ऋण पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
4. बैंकिंग क्षेत्र पर अप्रत्यक्ष दबाव– गारंटी होने के बावजूद डिफॉल्ट की स्थिति में ऋण प्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है।
आगे की राह
- MSMEs के लिए डिजिटल ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना
- ऋण वितरण की निगरानी बढ़ाना
- केवल संकटग्रस्त लेकिन व्यवहार्य व्यवसायों को सहायता देना
- कौशल, बाजार और प्रौद्योगिकी सहायता के साथ वित्तीय सहायता को जोड़ना
- एयरलाइन एवं निर्यात क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक पुनरुद्धार नीति बनाना
निष्कर्ष
ECLGS 5.0 भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण आर्थिक राहत पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक एवं क्षेत्रीय संकटों से प्रभावित व्यवसायों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है।
यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, तो यह:
- MSMEs को पुनर्जीवित करने,
- रोजगार सुरक्षित रखने,
- बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बढ़ाने,
- तथा आर्थिक विकास को गति देने
में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
